जमशेदपुर में बुलडोजर कार्रवाई पर फिलहाल विराम, 24 इमारतों के ध्वस्तीकरण पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

जमशेदपुर में बुलडोजर कार्रवाई पर फिलहाल विराम, 24 इमारतों के ध्वस्तीकरण पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

जमशेदपुर।

नक्शा उल्लंघन और अवैध निर्माण को लेकर जमशेदपुर में चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम हस्तक्षेप करते हुए बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें शहर की 24 विवादित बहुमंजिला इमारतों को गिराने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।

इस फैसले के बाद शहर के रियल एस्टेट कारोबारियों और भवन स्वामियों को तत्काल राहत मिली है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई करते हुए फिलहाल किसी भी तरह की तोड़फोड़ कार्रवाई पर रोक लगाने का निर्देश दिया।

9 मार्च को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई के लिए 9 मार्च की तारीख तय की है। इसी दिन यह तय होगा कि इन बहुमंजिला इमारतों का भविष्य क्या होगा और ध्वस्तीकरण के आदेश पर अंतिम निर्णय क्या लिया जाएगा।

अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तौसीफ अली, राजेश चौधरी और जवाहर विग से जुड़ी पूर्व याचिकाओं को भी मुख्य मामले के साथ जोड़ दिया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार, जिला प्रशासन और मूल याचिकाकर्ता राकेश झा को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

किन इमारतों को मिली राहत

झारखंड हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद बिष्टुपुर स्थित टीके इंडिया रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड, सोनारी कागलनगर में कामेश्वर की संपत्ति और साकची न्यू बाराद्वारी क्षेत्र में पूरबी बनर्जी की इमारतों समेत कई अन्य भवनों पर बुलडोजर चलने की तैयारी पूरी कर ली गई थी। जमशेदपुर अक्षेस (JNAC) ने ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू करने की योजना बना ली थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह कार्रवाई फिलहाल रुक गई है।

क्या है पूरा विवाद

यह पूरा मामला जमशेदपुर के रिहायशी और व्यावसायिक इलाकों में स्वीकृत नक्शों के उल्लंघन कर किए गए अवैध निर्माण से जुड़ा है। झारखंड हाईकोर्ट ने जनहित को ध्यान में रखते हुए इन निर्माणों को गैरकानूनी मानते हुए उन्हें गिराने का आदेश दिया था।

हाईकोर्ट के फैसले से शहर के रियल एस्टेट सेक्टर में हड़कंप मच गया था, जिसके बाद भवन निर्माताओं और संपत्ति मालिकों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अब सभी की निगाहें 9 मार्च की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इन इमारतों की वैधता पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।